आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक
कौन जीता है, तेरी ज़ुल्फ़ की सर होने तक
दाम-ए हर मौज में है हल्का-ए काम-ए निहाँग
देखें क्या गुज़रे है कतरे पर गुहार होने तक
आशिकी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूं, खून-ए जिगर होने तक
हमने माना की तगाफुल न करोगे, लेकिन...
खाक हो जायेंगे हम, तुमको खबर होने तक
पर्तव-ए खुर से है शबनम को फना की तालीम
मैं भी हूँ एक इनायत की नज़र होने तक
या-एक नज़र बेश नहीं फुर्सत-ए हस्ती गाफिल
गरमी-ए बज़्म है इक रक्स-ए शरार होने तक
गम-ए हस्ती का असद किस से हो जुज़ मर्ग इलाज
शम्मा हर रंग में जलती है सेहर होने तक
(may need phonetic corrections. will have to refer to the original composition at some point. until then, enjoy this ghazal seher hone tak).
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